| 000 | 01434nam a22002777a 4500 | ||
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| 010 | _aHIN-91186 | ||
| 020 | _c150.00 | ||
| 035 | _aHN-63532 | ||
| 037 | _bDBAD/PUB | ||
| 040 |
_aDPL _bHN |
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| 082 |
_2क _aक |
||
| 100 |
_aपाण्डेय, जगदीशचंद्र _924598 |
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| 245 |
_aअपना-अपना दुख / _cजगदीशचंद्र पाण्डेय |
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| 246 |
_aApan Apna Dukh _bby Jagdishchandra Pandey |
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| 260 |
_aनई दिल्ली _bगुप्ता प्रकाशन _c2010 |
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| 270 |
_aएस-ब्लाक, ग्रेटर कैलाश-1, 419- ग्राउंड फ्लोर _bनई दिल्ली _e110048 _k9891000034 |
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| 300 |
_a96पृ. _c22सेमी (सजिल्द) |
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| 500 | _aहिन्दी अकादमी, दिल्ली द्वारा पुरस्कृत कहानी-संग्रह / | ||
| 500 | _aसमान ISBN 9788190714150 शीर्षक 'नवोन्मेष बैंकिगः?' | ||
| 650 |
_aलघु कथाएँ, हिन्दी _91169 |
||
| 700 | _924599 | ||
| 942 |
_2ddc _cHN _mपाण्डेय _hक |
||
| 999 |
_c48985 _d48985 |
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