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037 _bपु.प्र.अ.प्र/प्रका
082 _a181.499
245 _aचैत्य पुरूषः (अन्तरात्माः मूल स्वभाव, निर्धारित कार्य और क्रमिक विकास) /
_cश्री अरविन्द और श्रीमां के वचनों से संकलित
246 _aChaitya Purush
_bcompiled by Sriarvind aur Sriman
260 _aपॉण्डिचेरी
_bश्री अरविन्द आश्रम प्रकाशन
_c2007
270 _aश्री अरविन्द आश्रम प्रकाशन
_bपॉण्डिचेरी
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300 _a263पृ
_c19सेमी (अजिल्द)
500 _aश्री अरविन्द और श्रीमां के वचनों से संकलित
942 _adpl
_cHN
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_m चैत्यपु
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