होतीं बस आँखें ही आँखें :
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होतीं बस आँखें ही आँखें : नागार्जुन-यात्री का सृजन संसार / अरूण कुमार एवं कमलानंद झा द्वारा संपादित.- दिल्ली:विकल्प प्रकाशन,2010.
344पृ;23सेमी (सजिल्द)
ISBN:9789380821009 Rs. 600.00
DBAD / PUB /HIN-93094/ HN-65440 / 600.00 /sign
